July 13, 2020

अंधेरे Andhere

अंधेरे में रह जाने की ख्वाहिश है कुछ देर की हमारी,
बहुत दिनों से रोशनी से नाराज़ परेशान हैं आंखें हमारी,

वैसे तो गलती किसी की भी नहीं न हमारी न तम्हारी,
लेकिन चलो अंधेरे के बहाने ही सही,
ठोकर का इलज़ाम अंधेरे पे डाल देंगे


सुगम बडियाल

No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.