अंधेरे में रह जाने की ख्वाहिश है कुछ देर की हमारी,
बहुत दिनों से रोशनी से नाराज़ परेशान हैं आंखें हमारी,
वैसे तो गलती किसी की भी नहीं न हमारी न तम्हारी,
लेकिन चलो अंधेरे के बहाने ही सही,
ठोकर का इलज़ाम अंधेरे पे डाल देंगे
सुगम बडियाल
बहुत दिनों से रोशनी से नाराज़ परेशान हैं आंखें हमारी,
वैसे तो गलती किसी की भी नहीं न हमारी न तम्हारी,
लेकिन चलो अंधेरे के बहाने ही सही,
ठोकर का इलज़ाम अंधेरे पे डाल देंगे
सुगम बडियाल
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