कुछ बातें
होठों पर दबी हैं,
कुछ जज़्बात
दिल में ही सज़े हैं,
कुछ तनहाईआँ
अंग्ड़ाईआँ ले रही हैं,
कुछ मुस्कानें
दर्द बियां करती हैं,
वकत वकत की बात है,
ये हर पल बदलती हैं।
सुगम बडियाल
होठों पर दबी हैं,
कुछ जज़्बात
दिल में ही सज़े हैं,
कुछ तनहाईआँ
अंग्ड़ाईआँ ले रही हैं,
कुछ मुस्कानें
दर्द बियां करती हैं,
वकत वकत की बात है,
ये हर पल बदलती हैं।
सुगम बडियाल
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